क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसी जगह है, जहाँ अगर आप कुछ मिनटों के लिए भी खड़े हो जाएं, तो आपकी जान जा सकती है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं चर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट (Chernobyl Nuclear Plant) के बेसमेंट में मौजूद ‘एलिफेंट्स फुट’ की।
इसे दुनिया की सबसे खतरनाक और जहरीली चीजों में से एक माना जाता है। आइए जानते हैं आखिर यह क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है।

1. एलिफेंट्स फुट क्या है? (What is Elephant’s Foot?)
सन 1986 में, यूक्रेन के चर्नोबिल में इतिहास की सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना (Nuclear Disaster) हुई थी। रिएक्टर नंबर 4 में विस्फोट होने के कारण वहां का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया था।
इस गर्मी से न्यूक्लियर फ्यूल, रेत, कंक्रीट और स्टील सब कुछ पिघलकर लावा जैसा बन गया। यह लावा बहते हुए रिएक्टर के बेसमेंट में जमा हो गया। जब यह ठंडा हुआ, तो इसका आकार एक हाथी के पैर (Elephant’s Foot) जैसा बन गया। इसलिए इसे यह नाम दिया गया।
2. यह किस चीज़ से बना है? (Composition of Corium)
वैज्ञानिक भाषा में इस पदार्थ को ‘कोरियम’ (Corium) कहा जाता है। यह कोई साधारण पत्थर नहीं है। इसमें यूरेनियम (Uranium), ग्रेफाइट, कंक्रीट और पिघली हुई धातुएं शामिल हैं।
यह इतना सख्त है कि इसे ड्रिल मशीन से भी तोड़ा नहीं जा सकता। वैज्ञानिक इसे तोड़ने के लिए राइफल की गोलियों (AK-47) का इस्तेमाल करने की कोशिश कर चुके हैं।
3. यह इतना खतरनाक क्यों है? (Why is it so Dangerous?)
जब इसकी खोज हुई थी, तब यह इतना ज्यादा रेडियोएक्टिव (Radioactive) था कि इसके पास जाने वाला इंसान तुरंत मर सकता था।
• 30 सेकंड: चक्कर आना और थकान।
• 2 मिनट: शरीर की कोशिकाओं (Cells) का नष्ट होना शुरू।
• 4-5 मिनट: मौत पक्की।
उस समय इससे निकलने वाला रेडिएशन 10,000 रोंटजेन (Roentgens) प्रति घंटा था, जो सामान्य इंसान की सहनशक्ति से हजारों गुना ज्यादा था।
4. इसकी फोटो कैसे ली गई? (The Famous Photo)
आप इंटरनेट पर जो Elephant’s Foot की फोटो देखते हैं, उसे लेना बहुत मुश्किल था। शुरुआत में कैमरा भी इसके रेडिएशन के कारण खराब हो जाते थे।
वैज्ञानिकों ने शीशे और रिमोट कैमरा का इस्तेमाल करके इसकी तस्वीरें लीं। कुछ बहादुर लोग इसके पास गए, लेकिन उन्हें बाद में गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ा।
5. आज इसकी स्थिति क्या है? (Current Status)
आज, लगभग 40 साल बाद, एलिफेंट्स फुट थोड़ा ठंडा हो चुका है। इसका रेडिएशन पहले से कम हुआ है, लेकिन यह अभी भी इंसानों के लिए सुरक्षित नहीं है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आने वाले हजारों सालों तक ऐसे ही जहरीला बना रहेगा। इसे अब न्यूक्लियर वेस्ट (Nuclear Waste) की तरह सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है।
निष्कर्ष (Conclusion)
चर्नोबिल का एलिफेंट्स फुट हमें याद दिलाता है कि परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) अगर बेकाबू हो जाए, तो कितनी भयानक तबाही मचा सकती है। यह मानव इतिहास का एक काला अध्याय है जो आज भी चर्नोबिल के बेसमेंट में कैद है।